
बिलासपुर। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने नव प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आने वाले 20 से 25 वर्षों तक छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यशैली, छवि और जनविश्वास की जिम्मेदारी इसी नए बैच के कंधों पर होगी। उन्होंने अधिकारियों को अनुशासन, तकनीकी दक्षता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
रक्षित केंद्र बिलासपुर स्थित चेतना भवन में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक में आईजी श्री गर्ग एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने रेंज के सभी जिलों में पदस्थ नव प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के कार्य, प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में आईजी ने कहा कि वर्दी पहनने के बाद पुलिस अधिकारी का हर व्यवहार पूरे विभाग की पहचान बन जाता है। इसलिए अधिकारियों को मर्यादित आचरण, ईमानदारी और कानून के प्रति सम्मान बनाए रखना होगा। उन्होंने यातायात नियमों के पालन से लेकर सार्वजनिक जीवन में अनुकरणीय व्यवहार अपनाने पर विशेष जोर दिया।
तकनीकी युग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए आईजी ने CCTNS, ई-साक्ष्य, सशक्त, I/O मितान और समाधान जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग को अनिवार्य बताया। साथ ही साइबर अपराध, सोशल मीडिया और कंप्यूटर संचालन में दक्षता विकसित करने के निर्देश दिए।
विवेचना को पुलिसिंग की रीढ़ बताते हुए उन्होंने प्रशिक्षुओं को समन और वारंट तामील करने, पुरानी एफआईआर व चार्जशीट का अध्ययन करने तथा अनुभवी विवेचकों से सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मजबूत जांच और साक्ष्य ही अपराधियों को सजा दिलाने का आधार बनते हैं।
जनता के प्रति संवेदनशीलता को पुलिस की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए आईजी ने कहा कि थाने पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति न्याय और भरोसे की उम्मीद लेकर आता है। उसकी बात धैर्यपूर्वक सुनना और कानून के दायरे में त्वरित कार्रवाई करना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है।
बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी नव प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करें, जिससे छत्तीसगढ़ पुलिस की विश्वसनीयता और जनविश्वास और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निष्ठा, अनुशासन और ईमानदारी के साथ सेवा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।










